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कृषि कर्मण मध्यप्रदेश के मंत्री जी भड़के, रिपोर्टर से कहा,‘आकर बताता हूं’

भोपाल। मध्य प्रदेश में खेती और उससे मिल रहे रिटर्न्स की अजब स्थिति सामने आई है। बीते 3 सप्ताह में 24 किसानों की आत्महत्या हुई लेकिन खेती से जुड़े शिवराज सिंह चौहान कैबिनेट के 18 मंत्रियों को खेती से अच्छा-खासा मुनाफा हुआ। इतना ही नहीं, जब एक नेता से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कुछ इस लहजे में जवाब दिया, ‘तू आजा, बैठ के बता दूंगा।’
कृषि मंत्री गौरी शंकर से खेती की हालत पर बात करते ही वह उपलब्धियां गिनवाना शुरू कर देते हैं। उनके मुताबिक, इस साल 26 प्रतिशत ग्रोथ, तीसरे साल लगातार ग्रोथ रेट 20 प्रतिशत के पार, 5 कृषि कर्मण अवॉर्ड्स जैसी उपलब्धियों इस राज्य को हासिल हैं। वह कहते हैं, हमारा राज्य 6 सालों से दो बार ‘सबसे तेज कृषि ग्रोथ’ में अवॉर्ड हासिल कर रहा है। वह कहते हैं कि देश में सबसे ज्यादा उत्पादन के मामले में भी मध्य प्रदेश शीर्ष पर है।

फिर किसान परेशान क्यों हैं? इस सवाल पर वह कहते हैं, मैं यह भोपाल जाकर बताऊंगा। साल 2013 में इलेक्शन कमिशन को सौंपे एफिडेविट में मध्य प्रदेश के मंत्रियों ने दावा किया कि वह खेती से लाखों कमा रहे हैं। फिर इतनी संख्या में किसानों की आत्महत्याएं क्यों हो रही हैं? 20 कैबिनेट मंत्रियों में से 18 ने माना कि उनकी आय के मुख्य सोर्सेज में कृषि भी है। नरोत्तम मिश्रा, गोपाल भार्गव, प्रकाश धुर्वे, विजय सिंह जैसे नेताओं ने माना है कि वे कृषि से अच्छा-खासा कमा रहे हैं। यहां तक कि इनमें से मिश्रा, भार्गव और पवैया जैसे नेताओं ने तो कृषि को एकमात्र इनकम करार दिया है।

2013 में सौंपे ऐफिडेविट के मुताबिक, मिश्रा ने 13 लाख प्रतिमाह कृषि आय का जिक्र किया। जब अंग्रेजी अखबार टाइम्स आॅफ इंडिया के संवाददाता ने पूछा कि वे ऐसे टिप्स साझा करें, जिससे किसानों को भी कृषि से बेहतर कमाई हो, तो वे भड़क गए। उन्होंने कहा, ‘तू आ जा, बैठ के बता दूंगा।’ कैबिनेट कॉलीग भार्गव का कहना था, ‘किसानों की आत्महत्याएं लोकल लीडरशिप के कंट्रोल से रोकी जा सकती हैं। मेरी विधानसभा क्षेत्र में कृषि लाभप्रद है, एक भी किसान ने आत्महत्या नहीं की है।’

परेशान किसानों में से एक विजय सिंह 5 लाख कर्ज तले दबे हैं और सिंचाई न होने के चलते फसल से मुनाफा नहीं कमा पा रहे हैं। जमीनी हकीकत यह है कि किसान साहूकारों से ऋण लेकर बैंक का ब्याज भर रहे हैं, जिससे वे डिफॉल्टर न हो जाएं। कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा कहते हैं कि आपको एक भी बेजेपी नेता खेती-किसानी के कर्ज तले दबा हुआ नहीं मिलेगा। किसानों को इन नेताओं से खेती से लाखों कमाने की तरकीब सीखनी ही चाहिए।

About Author Mohamed Abu 'l-Gharaniq

when an unknown printer took a galley of type and scrambled it to make a type specimen book. It has survived not only five centuries.

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