‘ब्लू व्हेल’ के जाल में फंसा #Damoh का छात्र, ट्रेन से कटकर मौत
दमोह। मध्यप्रदेश में खतरनाक गेम ब्लू व्हेल से पहली मौत हो गई। दमोह में एक 11वीं के स्टूडेंट सात्विक पांडे ने गेम का आखिरी टॉस्क पूरा करने के लिए आत्महत्या कर ली। सात्विक ट्रेन के सामने घुटने टेककर बैठ गया था। जिससे उसका शव क्षत-विक्षत हो गया। सात्विक की जहां मौत हुई वहां से कुछ दूरी पर लगे सीसीटीवी कैमरे में कुछ फुटेज मिले। इनमें सात्विक फुटेरा फाटक के डाउन ट्रैक पर सीमेंट के खंभे के पास बैठा हुआ है। उसके पिता संजय पांडे जनपद पंचायत दमोह में पदस्थ हैं। एसपी विवेक अग्रवाल ने बताया कि सात्विक का मोबाइल फोन लॉक है। जांच में डाटा सामने आ जाएगा।
छोटे शहरों में दस्तक
ब्लू व्हेल गेम 7 दिन में इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर जैसे बड़े शहरों के साथ ही छतरपुर, शहडोल, होशंगाबाद, समेत मध्य प्रदेश के 27 शहरों में सर्च किया गया। यह ट्रेंड 27 अगस्त से लेकर 3 सितंबर तक का है। इस दौरान यह गेम सबसे ज्यादा छतरपुर में तलाशा गया, होशंगाबाद दूसरे नंबर पर रहा।
देश में 7 दिन में चौथी मौत
खतरनाक ब्लू व्हेल से मौत का यह सात दिनों के भीतर यह चौथा मामला है। इससे पहले 1 सितंबर को गुजरात में 20 साल के अशोक मुलाणा ने नदी में छलांग लगाकर जान दी। फिर, 31 अगस्त को पुडूचेरी में एमबीए फर्स्ट ईयर के छात्र शशिकुमार ने फांसी लगाई। इसके बाद 30 अगस्त को तमिलनाडु के मदुरै में बी.कॉम के छात्र 19 साल के विग्नेश ने फांसी लगा ली थी।
ब्लू व्हेल गेम नहीं एक ट्रैप
जिस ब्लू व्हेल को गेम मानकर टीन एजर्स जाल में फंस रहे हैं, दरअसल वह गेम है ही नहीं। यह अपराधी किस्म के लोगों का एक ट्रैप है, जो दुनियाभर में अब तक 130 से ज्यादा लोगों की जान ले चुके हैं। नासमझी में बच्चे इसके आसानी से शिकार बन रहे हैं। ‘ब्लू व्हेल’ के पीछे दिमाग है मास्को (रूस) के फिलिप बुडेईकिन का। उसे गिरफ्तार किया जा चुका है और वह तीन साल की सजा काट रहा है। गेम से पहली मौत का मामला 2015 में आया था। गिरफ्तारी के बाद फिलिप ने कहा था, ‘गेम का मकसद समाज की सफाई करना है।’ फिलिप की नजर में सुसाइड करने वाले सभी लोग ‘बायो वेस्ट’थे।
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